पट्टी तहसील में गोलीकांड: हाईकोर्ट ने एफ.आई.आर. रद्द करने की याचिका की खारिज
उच्च न्यायालय ने तहसील परिसर में गोली चलाने को गंभीर अपराध मानते हुए याचिकाकर्ता को लगाई फटकार पुलिस की निष्क्रियता पर उठ रहा सवाल

प्रतापगढ़ (पट्टी)। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने थाना पट्टी में दर्ज एफ.आई.आर. संख्या 0061/2025 को रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में दावा किया गया था कि एक ही घटना पर दो एफ.आई.आर. दर्ज की गई हैं, लेकिन न्यायालय ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
क्या है मामला?
याचिकाकर्ता अधिवक्ता विकास श्रीवास्तव पर आरोप है कि उन्होंने पट्टी तहसील स्थित उप-जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में असलहे से अधिवक्ता मनीष तिवारी और अधिवक्ता रवि सिंह के ऊपर फायरिंग की। पुलिस ने मौके से घटना में प्रयुक्त कारतूस भी बरामद किए हैं। इस आधार पर बी.एन.एस. 2023 की धारा 109(1), 352, 351(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
क्या कहा अदालत ने?
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता का तर्क था कि इसी घटना को लेकर दो एफ.आई.आर. दर्ज की गई हैं, इसलिए दूसरी एफ.आई.आर. को रद्द किया जाए। इस पर अधिवक्ता प्रशांत विक्रम सिंह (जो अधिवक्ता मनीष तिवारी उर्फ बबलू की ओर से पेश हुए) ने तर्क दिया कि दोनों घटनाएँ अलग-अलग स्थानों पर, आधे घंटे के अंतराल में हुई थीं, इसलिए ये स्वतंत्र एवं गंभीर प्रकृति के अपराध हैं।
कोर्ट ने माना कि एफ.आई.आर. में दर्ज आरोप गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है। साथ ही, घटनास्थल से बरामद सबूत (कारतूस) भी इस आरोप को पुष्ट करते हैं। इसलिए अदालत ने अपनी विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग करने से इनकार कर दिया और याचिका को खारिज कर दिया।
पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल
उच्च न्यायालय ने तहसील परिसर में गोली चलाने को गंभीर अपराध मानते हुए याचिकाकर्ता को फटकार भी लगाई। अब सवाल उठता है कि घटना के एक सप्ताह बाद भी पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने में असफल क्यों रही है? प्रशासन की इस निष्क्रियता पर भी निगाहें टिकी हैं।